बरखंडी धाम

 सीकर – झुंझुनूं सीमावर्ती यह धाम लोहार्गल – रघुनाथगढ़ की पहाड़ियों के बीच लगभग 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।  यह अरावली पर्वतमाला की 7 वीं सबसे ऊंची चोटी है। सावन के महीने में तो यहां का दृश्य देखते ही बनता है । यहां पर इस महीने में बाबा बरखंडी के श्रद्धालुओं की भीड़  रहती है। यह स्थान रोमांच पसंद करने वालों के लिए एक बेहतरीन जगह है।

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास कुछ इस प्रकार है कि बहुत समय पहले लोहार्गल में दो साधुओं का आगमन हुआ जिनमें एक थे बाबा चेतनदास और दूसरे बाबा बरखंडी । एक बार बाबा बरखंडी ने अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए अपना चिमटा फेंका जो 1100 मीटर ऊपर बनी इस चोटी पर आ रुका। जिसके बाद बाबा कुछ मिस्त्री लेकर और अपने तप के प्रयोग से बनाए गए एक परात चूने का घोल और एक कमंडल लेकर चोटी पर पहुंचे। उसके बाद बाबा ने यहां पानी संचय करने के लिए एक पानी का टांका और कुटिया का निर्माण करवाया। सिर्फ एक परात चूने से यह निर्माण होते देख मिस्त्री अचरज में पड़ गए तथा परात का कपड़ा हटा कर देखा जिसके बाद वह चूना खत्म हो गया और कार्य वहीं रुक गया। तत्पश्चात कुछ वर्ष बाद बाबा ने वहीं समाधि ले ली।

English EN Hindi HI
Wordpress Social Share Plugin powered by Ultimatelysocial
Facebook
Instagram
Telegram
WhatsApp