शौभावत
लोहार्गल परिक्रमा के मार्ग पर पड़ने वाला यह स्थान पौराणिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है
ग्रंथों में चित्रगुप्त को महाशक्तिमान राजा के नाम से सम्बोधित किया गया है। ब्रह्मदेव के 17 मानस पुत्र होने के कारण वश यह ब्राह्मण माने जाते हैं इनकी दो शादिया हुई, पहली पत्नी सूर्यदक्षिणा/नंदनी जो ब्राह्मण कन्या थी, इनसे ४ पुत्र हुए जो भानू, विभानू, विश्वभानू और वीर्यभानू कहलाए। दूसरी पत्नी एरावती/शोभावति ऋषि कन्या थी, इनसे ८ पुत्र हुए जो चारु, चितचारु, मतिभान, सुचारु, चारुण, हिमवान, चित्र और अतिन्द्रिय कहलाए।
इन्हीं रानी शोभावति के नाम पर इस स्थान का नाम शौभावत पड़ा।
Shobhagyawati is a religious destination located on shakanbari-goriya road & also
know as shobhawati on the name of river shobhawati. The river is famous for flowing underground until
sunset, after sunset water comes up & river becomes visible, with very first ray of sun the water level of river starts decreasing.