कुह(कोह) कुण्ड
यह स्थान शाकम्भरी माता सकरायधाम के मन्दिर से 1 K. M पश्चिम मे है, धर्म ग्रंथों मे इसका कुहीड़ कुण्ड नाम भी उल्लेख है पर आज कल इसे कौ कुण्ड कहते हैं। यहाँ रावण ने तपस्या की थी ओर एक कुण्ड बनाया था जिसका नाम रावण कुण्ड है, कुण्ड के किनारे यहाँ रावणेश्वर महादेव का मन्दिर भी है।इसके अलावा दो शिव मन्दिर ओर है इन मन्दिरो के बड़े शिव लिगं तथा सुन्दर गणेश प्रतिमाएं ध्यान आकर्षित करती है जो कम से कम दसवीं शताब्दी की है।पेड़ पौधे से समाच्छादित एक छोटी रमणीय धाटी मे स्थित यह स्थान बड़ा मनोहर है
किसी जमाने मे यहाँ 84 मन्दिर थे अब सब ध्वस्त हो गये। इस स्थान पर ब्रह्माजी के साथ शंकर जी ने धोर अहंकार वाले कुहिड़ को उत्पन पितृगणो का पुनरूद्धार किया था।
अतः इस स्थान का नाम कुह कुण्ड हुआ। इस स्थान मे स्नान कर यहाँ स्थित ब्रह्मदेव है, उनका पुजन करे।