गलत तरीके से जलाए गए दीयों से हो सकता है भारी नुकसान
Incorrectly lit diyas or lamp can cause losses for happiness peace and prosperity
गलत तरीके से जलाए गए दीयों से हो सकता है भारी नुकसान, सुख-शांति और समृद्धि के लिए ऐसे जलाएं दीप
हिन्दू धर्म में किसी भी रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार एवं शुभ मांगलिक कार्य को सम्पन्न करते समय होने वाली पूजा में दीपक अवश्य जलाया जाता है. इसके बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है.
हमारी सनातन संस्कृति में आदि काल से ऐसी परम्पराएं चली आ रही हैं, जिनके पीछे तात्त्विक महत्व एवं वैज्ञानिक तथ्य होते हैं. दीपावली पर दीपोत्सव त्योहार मनाया जाता है. उपनिषदों की देशना है,” अंधकार से प्रकाश की ओर” जाने की. हिन्दू धर्म में किसी भी रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार एवं शुभ मांगलिक कार्य को सम्पन्न करते समय होने वाली पूजा में दीपक अवश्य जलाया जाता है. इसके बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है. आम दिनों में भी मंदिरों और घरों में सुबह-शाम दीपक जलाने और आरती करने की परंपरा है. दीपक जलाने और आरती करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
दीपक जलाने से ग्रह दोष एवं वास्तु दोष भी दूर होते हैं. लेकिन कब, कैसे और किस तरह दीपक जलाया जाए और आरती की जाए, यह जानना भी बहुत जरूरी है.
प्रातः कालीन पूजा के दौरान सूर्योदय से दो घटी अर्थात 48 मिनट तक और संध्याकाल में सूर्यास्त से दो घटी अर्थात 48 मिनट तक प्रदोषवेला में दीपक जलाकर आरती करना अत्यंत शुभ माना गया है. दीया किस चीज का बना हो,यह भी महत्वपूर्ण है. प्रायः मिट्टी,आटा और पीतल से बने दिया अच्छे माने जाते है.
अलग-अलग प्रयोजन के लिए अलग तरीके से जलाया जाता है दीया
ज्योतिषाचार्य राजेश शुक्ला ने बताया कि आमतौर पर गाय के देशी घी और तिल का तेल का उपयोग किया जाता है. किन्तु किसी खास देवी या देवता की पूजा-अर्चना और विशेष प्रयोजन के लिए की जाने वाली पूजा के समय दीपक अलग-अलग प्रकार से जलाया जाता है. शनि की साढ़े साती और महादशा आदि चल रही हो तो शानिजनित पीड़ा की शांति के लिए सरसों के तेल का दीपक सायंकाल पीपल के पेड़ के नीचे रखना चाहिए. राहु, केतु प्रदत्त कष्टों के निवारण हेतु अलसी के तेल में दीया जलाएं. शत्रुओं से रक्षा हेतु भैरव जी के समक्ष चार बत्तियों वाला सरसों के तेल का दीपक रखें. वैवाहिक सुख की मनोकामना के निमित्त, महुए के तेल से दीपक जलाएं.
दीया बुझ जाए तो करना चाहिए ये काम
वैसे आमतौर पर सफेद रुई की बाती का प्रयोग होता है. लेकिन हनुमानजी और देवी जी की पूजा में सूत या मौली की बाती का भी प्रयोग किया जाता है. सदैव ध्यान रखिए कि घी का दीपक बायीं ओर और तेल का दायीं ओर रखा जाता है. पूजा के बीच में दीपक ना बुझे. यदि भूलवश बुझ जाए तो क्षमा याचना करके उसे पुनः जला दें. कभी भी एक दीये से दूसरे दीया को नही जलाना चाहिए. हमेशा अलग-अलग करके जलाएं. दीपक को कभी सीधे जमीन पर ना रख कर चावल, दीवट या किसी दूसरी चीज पर रखें. दीपक की लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे.
शाम को घर के मुख्य दरवाजे पर दीया जलाने से हैं कई फायदे
शत्रुओं से रक्षा या किसी विपत्ति के निवारण हेतु की जा रही पूजा में दीपक की बाती मध्य से ऊपर की ओर उठी हुई हो. शाम को घर के मुख्यद्वार के पास दीपक जलाकर रखने से घर के वास्तुदोष खत्म होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है. घर के सभी सदस्यों पर माता लक्ष्मी की कृपा रहती है. घर के अंदर रोज शाम को ईशान दिशा में देशी घी के दीपक से आरती होते रहने से माता लक्ष्मी घर में स्थायी निवास करती हैं.
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं सुख सम्पदम्।
शत्रुबुद्धि विनाशं च दीपज्योतिर्नमो sस्तु ते।।

jay maiya ki