MAA SHAKAMBHARI SHAKTIPITH-SAHARANPUR DHAM

MAA SHAKAMBHARI SHAKTIPITH-SAHARANPUR DHAM

जय जय शाकम्भरी माता?
* माता शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ मंदिर है
* माता के इस सिद्धपीठ का वर्णन महाभारत के वनपर्व, केदारखण्ड, ब्रह्म पुराण, पदम पुराण एवं देवी भागवत पुराण मे मिलता है
* स्कंद पुराण के अनुसार शाकम्भरी देवी क्षेत्र मे शाकेश्वर महादेव प्रत्यक्ष सिद्धिदायक है जो माता शाकम्भरी देवी भवन के पीछे की और है
* यहाँ पर प्रथम पूजा बाबा भूरादेव की होती है क्योंकि देवी शाकम्भरी ने देवासुर संग्राम मे शहीद हुए अपने भक्त को वरदान दिया था इन भूरादेव को कालभैरव का रूप माना गया है
* यह सिद्ध क्षेत्र है और प्राचीन काल से ही ऋषियों और मुनियों की तपस्थली रहा है
* इसी स्थान पर भगवती शाकम्भरी ने सहस्त्र वर्ष तक केवल महीने के अंत मे मधुर शाक खाकर तप किया था ऐसा वर्णन महाभारत मे है
* यह भगवती शताक्षी का सिद्ध स्थान है
* पांच महादेव इस सिद्धपीठ की रक्षा करते हैं जो शिवशक्ति का अनूठा संगम है
* मंदिर के इशानकोण मे बीरखेत का मैदान है जहाँ शाकम्भरी देवी ने दुर्गमासुर का वध किया था
* शाकम्भरी, शताक्षी तथा दुर्गा एक ही देवी के नाम है…. मूर्ति रहस्यम
* इस सिद्धपीठ के पांच कोस की परिधि मे पंचमुखी हनुमान, पंच महादेव, भुरादेव, महाविद्या छिन्नमस्ता, रक्तदंतिका, सहंश्रा ठाकुर, गौतम ऋषि की गुफा, बाण गंगा, वज्र शिला, सुर्यकुण्ड, महाकाली की गुफा,भगवान विष्णु के प्राचीन मंदिर, प्रेत शिला सरीखे अनेकों तीर्थ विद्यमान है
* देवी शाकम्भरी के साथ दायीं और भीमा एवं भ्रामरी तथा बायीं और शताक्षी देवी प्रतिष्ठित है साथ ही दाहिने बाल गणपति की भी मूर्ति है
* शाकम्भरी देवी भवन की परिक्रमा मे काल भैरव, माँ कामाख्या, माँ ज्वाला देवी, माँ महाकाली, गणेश जी, हनुमान जी, भगवान शिव आदि की सुंदर प्राचीन प्रतिमाएँ है
* एक दृढ़ मान्यता के अनुसार यह एक शक्तिपीठ है यहाँ पर सती का शीश गिरा था

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